Aanan Ki Khak Ra Ba-Nazar Kimiya Kunand

anan ki khaak ra ba-nazar kimiya kunand

aaya buvad ki gosha-e-chashme ba-ma kunand

ऐ काश मुझ पे भि वो निगाह-ए-करम करें

करते हैं इक नज़र में जो मिट्टी को किमिया

dardam nahufta ba ze-tabiban-e-muddai

bashad ki az khazana-e-ghaibash dava kunand

अच्छा है उन तबीबों से मख़्फ़ी हो मेरा दर्द

अपने वो गुंज-ए-ग़ैब से मेरी करें दवा

maashuq chuun naqab ze-rukh bar nami kashad

har kis hikayate ba-tasavvur chara kunand

मा’शूक़ जब उठाता नहीं अपना ख़ुद नक़ाब

क्यूँ पेश कर रहे हैं ख़याली वो माजरा

chuun husn-e-aqibat na ba-rindi-o-zahidist

aan ba ki kar-e-khud ba-inayat raha kunand

रिंदी-ओ-ज़ुहद से जो मयस्सर नहीं वो हुस्न

बेहतर है अपना छोड़ दें ख़ुद उस पे मुद्दआ

be-maarifat ma-bash ki dar man yazid-e-ishq

ahl-e-nazar muamla ba ashna kunand

वाक़िफ़ हैं राज़-ए-इश्क़ से जो अहल-ए-मा’रिफ़त

रखते हैं उनसे रब्त जो हैं उनसे आशना

haale darun-e-parda base fitna mi-ravad

ta aan zaman ki parda bar-uftad che ha kunand

दर-पर्दः उनके फ़ित्नों का है एक सिल्सिलः

जब तक उठेगा परदा न जाने करें वो क्या

gar sang az iin hadis ba-nalad ajab madar

saheb-dilan hikayat-e-dil-khush-ada kunand

सुन कर यह बात चीख़ उठे पत्थर भी क्या अजब

करते हैं ख़ुश-अदाई से इज़्हार-ए-मुद्दआ

mi-khurad ki sad-gunah-e-ze-aghyar dar hijab

behtar ze-taati ki ba-rue-o-riya kunand

दर-पर्दः सौ गुनाह से बेहतर मय-कशी

बेकार ऐसा ज़ुहद है जो महज़ हो रिया

pinhan ze-hasidan ba-khudam khvan ki muniman

khair-e-nihan barae raza-e-khuda kunand

पोशीदः हासिदों से तू रह क्यूँकर अहल-ए-ख़ैर

करते हैं काम जिसमें ख़ुदा की हो बस रज़ा

‘hafiz’ davam-e-vasl mayassar nami shavad

shahan kam iltifat ba-hal-e-gada kunand

‘हाफ़िज़’ हमेशः वस्ल नहीं है नसीब में

होते हैं लुत्फ़-ए-शाह से कम बहरःवर गदा

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